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21
۞ وَاذكُر أَخا عادٍ إِذ أَنذَرَ قَومَهُ بِالأَحقافِ وَقَد خَلَتِ النُّذُرُ مِن بَينِ يَدَيهِ وَمِن خَلفِهِ أَلّا تَعبُدوا إِلَّا اللَّهَ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (ऐ रसूल) तुम आद को भाई (हूद) को याद करो जब उन्होंने अपनी क़ौम को (सरज़मीन) अहक़ाफ में डराया और उनके पहले और उनके बाद भी बहुत से डराने वाले पैग़म्बर गुज़र चुके थे (और हूद ने अपनी क़ौम से कहा) कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो क्योंकि तुम्हारे बारे में एक बड़े सख्त दिन के अज़ाब से डरता हूँ